नुआंव/कैमूर से गुड्डू गुप्ता की रिपोर्ट। जब घर परिवार की आपसी कलह,रिश्ते में दरार को अपनो से निपटाना मुश्किल हो जाता है। लोग पुलिस थाना या न्यायालय का चक्कर का लगाना पड़ता है। जब से पुलिस ने अपनी थर्ड डिग्री वाली मानसिकता को बदल पब्लिक व पुलिस मैत्री संबंध को स्थापित किया है। तब से पुलिस की सकारात्मक पहल और छवि भी समाज में बदली है। पुलिस ने अपने स्तर से कई ऐसा काम किया जो न्यायालय के चक्कर लगाने के बाद भी संभव नहीं था। हाल का मामला नुआंव बाजार से जुड़ा हुआ है।

स्थानीय नुआंव बाजार निवासी ओमप्रकाश गुप्ता की पुत्री दुर्गेश कुमारी की शादी लगभग 5 वर्ष पूर्व रामगढ़ के डहरक निवासी कृष्ण मुरारी गुप्ता के साथ हुई और दोनों को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति भी हुई। लेकिन समय ने ऐसा करवट बदला कि पति-पत्नी का प्यार दुश्मनी में बदल गया।रिश्ते इस कदर बिगड़े की आए दिन किच-किच शुरू हो गई। 

कई बार पति-पत्नी में सुलह समझौता कराने हेतु पंचायती भी हुई लेकिन मामला बनने के बजाय और बिगड़ता गया। अन्तोगत्वा पुत्र को लेकर पत्नी अपने मायके चली आयी। और पति-पत्नी दोनों बिछड़ गए।

पत्नी को घर लाने के लिए पति करता रहा प्रयासपति कृष्ण मुरारी  गुप्ता ने पत्नी को अपने नजदीक लाने का प्रयास कभी नहीं छोड़ा। जिसका नतीजा हुआ कि वह अपने मकसद में कामयाब हुआ। वह भी ऐसी स्थिति में कि न्यायालय में मुकदमा चलने के साथ पुत्र को लेने के चक्कर में कई बार पति दुर्व्यवहार का शिकार भी हो चुका था।पुत्र को लेने के बाद पति की बार-बार पुलिस से गुहार अचानक 25 मई 2021 को रंग लाई।

थाना अध्यक्ष सुनीत सिंह के प्रयास से थाना पर दोनों पक्षों के बीच घंटों चले सुलह समझौता के बाद माता और पिता के लाख विरोध के बावजूद पत्नी पति के साथ ससुराल जाने को राजी हो गई। शनिवार को अपने मायके अपनी सामान लेने के लिए आई तो पिता ने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दुर्गेश कुमारी को एक बार फिर पुलिस का शरण लेना पड़ा और पुलिस के हस्तक्षेप से मायके से अपना सारा सामान लेकर ससुराल चली गई। पूरे मामले में पुलिस के सक्रियता की चारों तरफ तारीफ हो रही है।

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