दुर्गावती कैमूर मुबारक अली । बच्चे भगवान का रुप होते हैं और उनको जन्म देता है, लेकिन इंसान यहां पर अपने मतलब और अपने भौतिक सुख के लिए गलतियां तो कर लेते हैं। फिर उन गलतियों का जो रुप सामने आता है उन जिम्मेदारियों से बचने के लिए फिर अपराध का सहारा लेते हैं.मानवता को शर्मसार कर देने वाली ऐसा ही कुछ हुआ कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड मे ग्राम रोहुआ खुर्द के खेत में जहां एक नवजात शिशु मिला.लोगों को वह नवजात शिशु शुक्रवार की सुबह जीटी रोड के किनारे खेत मे रोता हुआ मिला.

इसकी जानकारी होते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई स्थानीय लोगों का मौके पर भीड़ जुट गई.मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर दुर्गावती थाना क्षेत्र के रोहुआ गांव के पास शुक्रवार को सुबह शौच करने जा रहे ग्रामीणों के द्वारा अरहर के खेत में एक नवजात शिशु रोते हुए दिखाई दिया.यह चर्चा गांव में आग की तरह फैल गई इसकी खबर आसपास के लोगों को मिलते ही लोगों की मौके पर भीड़ जुट गई.

लेकिन कोई भी यह नहीं समझ पाया कि नवजात कहां से आया व किसने उसे यहां फेंका.उसके बाद नवजात शिशु को गांव के ही एक महिला ने बच्ची को पालन पोषण के लिए साथ ले चली गई.इसकी सुचना किसी ने चाइल्ड लाइन विभाग को दे दिया.सुचना पाकर चाइल्ड लाइन टीम के लीडर विनोद कुमार यादव एवं नीतू कुमारी मौके पर पहुंचकर नवजात शिशु को मांगने लगे लेकिन महिला ने बच्ची का पालन पोषण के लिए जिद पर अड़ गई.

इसकी सूचना दुर्गावती थाना अध्यक्ष संजय कुमार को मिली थाना अध्यक्ष संजय कुमार के द्वारा बच्ची को रखे परिजनों को काफी देर तक समझाने बुझाने के बाद बच्ची को चाइल्ड लाइन कर्मियों के हवाले कर दिया गया.जिसके बाद एंबुलेंस से बच्ची को दत्तक ग्रहण संस्थान भभुआ ले जाया गया.वहीं लावारिस हालात में नवजात शिशु मिलने पर मौके पर लोगों की तरह तरह के मुंह से बातें निकल रहा था.

सड़क किनारे खेत में लावारिस हालात में छोड़ दिया गया, क्यों कि वो बेटी थी. आखिर उसे जन्म देने वाले माता पिता ने ऐसा क्यों किया,वो तो बच्ची की किस्मत अच्छी थी की वो बच गयी.अगर कुछ देर हो जाती तो शायद उसका बचना मुश्किल हो जाता. कहा जाता है की पुत कपूत हो सकता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती,लेकिन ऐसा हुआ है. क्या बेटियां आज भी मां बाप के लिए बोझ है या फिर कोई दूसरा मामला तो नहीं.क्योंकि कई तरह के कयास लगाये जा रहे है.

दबी जुबान से कई लोगों ने बताया की हो सकता है कुंवारी माँ वाली कोई कहानी तो नहीं है जो लोक लज्जा या फिर समाज के भय के कारण बच्ची को जन्म देने वाली मां ने इतना बड़ा निर्णय ले लिया कि नौ माह तक अपने कोख में रखने और जन्म देने के बाद मरने के लिए वीराने में छोड़ दिया.

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