KAIMUR। बिहार में नीतीश के सरकार में जमा खान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनने के बाद शपथ ग्रहण कर कैमूर में गुरुवार को पहली बार पहुंचने पर जिला में विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं तथा लोगों द्वारा फूल मालाओं तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर गर्मजोशी के साथ अभिनंदन तथा उनका भव्य स्वागत किया गया. जामा खान के स्वागत एवं अभिनंदन के लिए स्थानीय लोग एवं कार्यकर्ता पहले से मोहनिया चांदनी चौक के पास इंतजार कर रहे थे जैसे ही उनका काफिला चांदनी चौक के पास पहुंचा अपने लोकप्रिय नेता की एक झलक पाने को स्थानीय लोगों के साथ जिला के विभिन्न स्थानों से पहुंचे लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा.

लोगों द्वारा फूल मालाओं के गर्मजोशी के साथ अभिनंदन तथा स्वागत किया.इस दौरान मंत्री जामा खान ने कहा कि बसपा छोड़कर जदयू में आने का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के गरीब व पिछड़े लोगों का विकास करना है क्षेत्र की हर वर्ग की जनता ने जिस उम्मीद के साथ भारी बहुमत के साथ जिताया है बसपा में रहकर उनकी आशाओं को पूरा करना संभव नहीं था. इसलिए विकास पुरुष नीतीश कुमार के साथ आने का निर्णय लिया.उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं को ले शुरू से ही संघर्ष करता रहा हूं और उसी के बदौलत जनता की सेवा करने का मौका मिला है.मौके पर कैमूर जदयू जिलाध्यक्ष इसरार खान, मासुख खान,इमरान खान, हनिफ खान, आलोक सिंह,नौसाद अली,मुख्तार अंसारी, इलियास अंसारी,रिजवान, सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

गौरतलब है कि बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में चैनपुर से ही बसपा ने जीत दर्ज की थी.वही बसपा को छोड़कर चैनपुर विधायक जामा खान जदयू में शामिल हो गए. बिहार में मंगलवार को मंत्रिमंडल का विस्तार होने पर उनको अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री का पद मिल गया. मंत्री बनने के बाद पहली बार गुरुवार को कैमूर जिला में आगमन हुआ कार्यकर्ता लोगों द्वारा विभिन्न जगहों पर भव्य स्वागत किया गया
बताते चले की चैनपुर विधायक जामा खान ने काफी संघर्ष किया चैनपुर विधानसभा से तीन – चार बार चुनाव भी लड़ा।


काफी कम वोट से हार मिली थी फिर भी उन्होंने जनता के बीच हमेशा साथ खड़ा रहा आखिर चैनपुर विधानसभा 2020 में जनता ने भाजपा विधायक व बिहार सरकार खान व भूतत्व मंत्री बृजकिशोर बिंद ने अपना समर्थन नहीं कर बसपा के जमा खान को जमकर वोट बरसाए और विधायक बना दिया.
मोहम्मद जमा खान चैनपुर विधानसभा सीट से बसपा के एक मात्र विधायक चुने गए थे. हाल ही में उन्होंनो जदयू की सदस्यता ग्रहण की. जदयू में शामिल होने के बाद मंगलवार को शपथ ग्रहण की.

वह चैनपुर विधानसभा के नौघड़ा गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता साहब जमा खान उस गांव के बड़े किसान हैं. जमा खान ने अपनी पढ़ाई लिखाई बनारस से की है. वो बीएचयू के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे हैं.उन्होंने पहली बार कैमूर जिले में 2002 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. 2005 में वे बीएसपी की टिकट पर महाबली सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन तब भी उनकी हार हो गई थी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here