– प्रकृति की रमणीयता व सुंदरता की छटा को देखने के लिए पर्यटक होते है आकर्षित
– 38 साल बाद 2014 में मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा दुर्गावती जलाशय परियोजना का किया गया था उद्घाटन 
– कैमूर व रोहतास के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 1976 में तत्कालीन उपप्रधान मंत्री बाबू जगजीवन राम ने रखा था नींव 
कैमूर से बंटी जायसवाल की रिपोर्ट …  
 नए साल 2021 के आगमन में बस कुछ ही दिन शेष बचे है. अभी से ही नए साल में जश्न व पिकनिक मनाने की तैयारियां युवा जुटे हुए है. कैमूर व रोहतास जिले में अगर आप नए साल के जश्न मनाने के लिए सोच रहे है तो आपके लिए दुर्गावती जलाशय परियोजना भी एक अच्छा पिकनिक स्पॉट हो सकता है. आप स्वयं एक बाद दुर्गावती जलाशय दीदार करने के बाद समझ जायेंगे. कैमूर पहाड़ी के वादियों के बीच दुर्गावती जलाशय अवस्थित है जहाँ नए साल के जश्न के लिए पिकनिक स्पॉट के रूप मना सकते है. अब यह पर्यटकों को लुभाने लगा भी है. कैमूर व रोहतास जिला की सीमा पर अवस्थित यह डैम अपनी रमणियता व प्राकृतिक सुंदरता को ले पूर्व से ही आकर्षण का केंद्र रहा है.

 जब से दुर्गावती जलाशय परियोजना का निर्माण हुआ तब से लोग इसे एक बार देखने के लिए तो कैमूर,रोहतास व अन्य जिलों व राज्यो से आते है. यहाँ पर्यटक या दर्शक आते है तो पिकनिक का आनंद लेना नहीं भूलते है. प्रकृति की सुंदर वादियों, समुन्द्र की तरह शांत जल के बीच अठखेलिया का आनंद लेना, चारो तरफ हरा भरा वृक्ष, झाड़िया के बीच घूमना लोगो को एक अलग ही सुकून देता है. खास कर बच्चों के लिए जब बंदर एक डाली से दूसरे डाली पर उछलते कूदते देखते है उनका ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है. इसके अलावा विशेष उत्सवों पर भी पिकनिक मनाने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुँचते है. यहाँ प्राकृतिक मनोरम छटा देखने योग्य है. 

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– झरना का भी उठा सकते है आनन्द 
वर्षा के दिनो में दुर्गावती जलाशय के बाबा गुप्तनाथ जाने वाली दक्षिण तरह रास्ते में एक किमी की दूरी पर पहाड़ी से गिरने वाली पानी झरने सा प्रतीत होता है. यहाँ पर बरसात के दिनों में लोग दुर्गावती जलाशय घूमने के दौरान झरना का आनंद लेना नहीं भूलते है. यहाँ पर लोग पिकनीक में तरह तरह के व्यंजन बना कर खाते हुए जिंदगी के कुछ लम्हो को याद के रूप में संयोग कर रखना चाहते है. फिर कहा ऐसे मधुर पल मिल सकते है.

 नए साल पर डीजे की धुन पर थिरकते हुए पिकनिक का लुफ्त उठाते है युवा 
कैमूर व रोहतास केे कोने-कोने से डीजे, साउंड बाक्स सहित अन्य म्यूजिक सिस्टमों के साथ युवकों को टोली पिकनिक मनाने के लिए पहुँचती है. यहाँ पर पहुंच कर युवकों की टोली संगीत की धुनों पर सुबह से लेकर शाम तक थिरकते हुए नए साल के स्वागत करते हुए पिकनीक का लुफ्त उठाते है. वहीं यहाँ पर वन विभाग, सिंचाई विभाग, जलाशय, व पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी नए साल को अलग अंदाज में मनाने के लिए पिकनीक का मनाते है. पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक चौबंद व्यवस्था की जाती है.

प्रकृति की गोद में बसा है डैम 
दुर्गावती जलाशय परियोजना रोहतास के शेरगढ़ पहाड़ी व कैमूर के राजादेव टोंगर के पास की पहाड़ी के बीच से बहने वाली दुर्गावती नदी पर बनाया गया है. इसके निर्माण का उद्देश्य कैमूर व रोहतास के 33 हजार हेक्टेयर भूमि का सिंचाई करना है. इस योजना का शिलान्‍यास 1976 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम ने किया था। इसके बाद इसके निर्माण में कई प्रकार की अड़चने आयी लेकिन 38 साल बाद वर्ष 2014 में मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी इस परियोजना का उद्घाटन किया गया. 

बांस के कुपड़ से निकली है दुर्गावती नदी सूत्रों के अनुसार दुर्गावती नदी खुखुमा नाम के पहाड़ पर बांस के कुपड़ में से निकली है. इसमें से सदैव पानी बहती रहती है. यही से निकलने के बाद आगे जाकर एक नदी का रूप धारण कर लिया है. डैम के पूर्वी तट पर शेरगढ़ का प्राचीन भूमिगत किला है जो  दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, इसे भी लोग दुर्गावती जलाशय घूमने के बाद शेरगढ़ के किला को घूमना नहीं भूलते है.

इस किले की रहस्यमयी दीवार जो पहाडी को काट कर बनाया गया है वो देखते ही बनता है. यहाँ से कुछ ही दूरी पर भुड़कुड़ा का प्राचीन किला भी सैकड़ों वर्षों से विद्यमान है. वहां जाने वाले सैलानी दर्शको को भ्रमण के लिए पूरा एक दिन भी समय कम पड़ जाता है. शेरगढ़ की ऊपरी प्राचीर से दुर्गावती जलाशय का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है. साल दर साल बढ़ रही पर्यटकों की भीड़ आने वाले दिनों में इस स्थल को पर्यटन का नया केंद्र स्थापित कर सकता है. 

सुविधा के नाम पर अभी कुछ नहीं है
दुर्गावती जलाशय पर प्रशासन के तरफ से अभी कोई सुविधा नहीं होता दिख रहा है. लोग यहाँ पर एक बार डैम को जरूर देखने के लिए आते है तो पिकनीक मनाना नहीं भूलते है. यहाँ पिकनीक में भोजन के रूप में ज्यादातर लोग ताजा ताजा मछली खाना पसंद करते है. यहाँ पर मछुआरे नाव व ट्यूब पर बैठ कर जाल से मछली मारते है. ताजा ताजा बड़ी बड़ी मछलिया दो से ढाई सौ रुपये किलो की मिलती है. ताजा मछली सभी जगह नहीं मिलने के कारण पिकनीक के रूप में मछली को तल कर खाना लोग काफी पसंद करते है. 

कैसे पहुँचे – कैमूर भभुआ जिला मुख्यालय से करीब 41किमी व रामपुर प्रखंड मुख्यालय से 19 किमी की दुरी पर दक्षिण कैमूर पहाड़ी पर स्थित है. यहाँ पहुँचने के लिए दो रास्ते है.एक सबार भभुआ मुख्य सड़क के बाद दक्षिण के तरह सबार भीतरीबाँध जाने वाली पथ से होकर व रोहतास के चेनारी से मल्हीपुर से होकर भी दुर्गावती डैम तक पहुँचा जा सकता है. दुर्गावती डैम का नजारा वर्षा के दिनों सावन के महीना में और आनन्द दुगुना कर जाता है.

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