भभुआ/कैमूर : गुरुवार को विधानसभा चुनाव के नामांकन का अंतिम दिन रहा है। जिले के चारो विधानसभा सीटों पर नामांकन के लिए कई पार्टी व निर्दलीय प्रत्याशियो की काफी गहमागहमी रही है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों ने अंतिम दिन अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। भभुआ विधानसभा क्षेत्र के लिए एनडीए गठबंधन से जदयू के टिकट कटने के बाद नाराज जदयू जिलाध्यक्ष डॉ प्रमोद सिंह पटेल ने बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पर्चा दाखिल किया।

उन्होंने एनडीए गठबंधन व पार्टी से बगावत कर कैमूरजदयू जिलाध्यक्ष के पद पर रहते हुए ही नामांकन किया है। दरअसल दो दिन पहले ही एनडीए गठबंधन की तरफ से कैमूर जिले के चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशियों को जीते हुए विधायको को मौका मिला।।जिसके बाद जदयू के जिलाध्यक्ष सीटों के बंटवारे को लेकर नाराज हो गए। जहां उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से माफी मांगने को लेकर जदयू कार्यालय में एक प्रेसवार्ता की।

इस प्रेसवार्ता के दौरान ही वह मीडिया के सामने जदयू की जिले में किसी भी सीटों पर टिकट नहीं मिल पाने के कारण नाराज थे। वह टिकट कटने को लेकर फूट फूट कर रोने लगे।इस दौरान उन्होंने कहा था यह कैसी गठबंधन है जिले के चारों सीट बीजेपी के पास, दो एमएलसी व एक सांसद भी बीजेपी के पास है। 
जिसको लेकर एनडीए गठबंधन के खिलाफ बगावत करने को तैयार हो गए।

कहा था मैं जदयू जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं दूंगा पार्टी चाहे तो निकाल दें। उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशियों को हराने का ऐलान भी कर दिया था। जिसके बाद वह गुरुवार को भभुआ विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय के खिलाफ अंतिम दिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। हालांकि प्रमोद सिंह भभुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप प्रतिनिधित्व कर चुके है। 

नामांकन के बाद जदयू जिलाध्यक्ष निर्दलीय प्रत्याशी डॉ प्रमोद सिंह पटेल ने कहा अपने कार्यकर्ताओं के कहने पर उनके हौसला की बदौलत ही आज निर्दलीय  प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है। मैंने जदयू नहीं छोड़ा है और न ही जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है। पार्टी को लगता है कि मैं बगावत कर रहा हूं तो वह मुझे बाहर निकाल सकती है। प्रत्याशियो के मालिक जनता, मतदाता है। उनके भाग्य के फैसला वही करेंगे। 

जनता जो फैसला करेगी मुझे मंजूर है। हमने जनता का सेवा पिछले 10 सालों से किया है। पार्टी में रहते हुए मैने  पार्टी को भी मजबूती दिलाने का काम किया है। कहीं से भी कोई दिक्कत नहीं है। कैमूर में चारों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। क्या ऐसे ही गठबंधन में चलता है। किसी जिले में गठबंधन से चार सीट मिले और दूसरे पार्टी को एक भी सीट नहीं।जब भभुआ विधानसभा से जदयू को दावेदारी नहीं मिला तो कार्यकर्ताओं की बदौलत,उनकी डिमांड पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप नामांकन किया है। जनता को तय करना होगा कि उनका सेवक कौन होगा।

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