Helth Desk : टाइफाइड को मियादी बुखार के रूप में जाना जाता है। जो एक संक्रामक बुखार है। यह बुखार साल्मोनेला बैक्टीरिया के संपर्क में आने से ही होता है। टाइफाइड होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान 102 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। गंदे पानी और संक्रमित भोजन से साल्मोनेला टायफी बैक्टीरिया फैलता है। टाइफाइड से पीडि़त मरीज का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।

अगर रोगी का व उसके आसपास साफ−सफाई का सही तरह से ख्याल रखा जाए तो आमतौर पर टाइफाइड से पीडि़त मरीज तीन से चार सप्ताह में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इसका इलाज संभव है। लेकिन यह बेहद आवश्यक है कि आप इसके लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से संपर्क कर जल्द से जल्द इलाज शुरू करें। तो आज हम आपको बताते है  टाइफाइड होने पर दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों के बारे में। जिन्हें आपको यह लक्षण नजर आएं तो पहचान कर बिल्कुल भी इलाज में देरी ना करें…

#तेज बुखार के साथ ठंड लगना,कमजोरी होना – डॉक्टर बताते है कि टाइफाइड का सबसे पहला और मुख्य लक्षण है बुखार का होना है। व्यक्ति का शरीर तपने लगता है। इस बुखार में तापमान 104 डिग्री तक भी पहुँच जाता है।अत्यधिक बुखार के कारण व्यक्ति के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है। वहीं तेज बुखार के साथ मरीज को ठंड लगती है। साथ ही कुछ स्थितयिों में त्वचा में रैशेज भी हो जाते हैं। टाइफाइड रैश छोटे गुलाबी स्पॉट होते हैं जिन्हें रोज स्पॉट भी कहा जाता है। प्रत्येक स्थान पर यह रैशेज लगभग 3 से 5 दिनों तक रहते है।

पेट में दर्द,भूख न लगना,सिर दर्द – डॉक्टर के मुताबिक, यह बुखार आपके पेट दर्द से सम्बंधित परेशानी में डाल सकता है। टाइफाइड रोगी को पेट में दर्द का अहसास होता है।मरीज को ऐसा लगता है कि उसका पेट मचोड़ रहा है। इस स्थिति में हल्का दर्द भी करता है। इसके अलावा उसकी भूख कम या अधिक भी हो सकती है। कुछ मरीजों को तो टाइफाइड होने पर बिल्कुल भी भूख नहीं लगती। चूंकि इस बीमारी में आपका पेट सबसे अधिक प्रभावित होता है। इसलिए अक्सर लोगों को टाइफाइड होने पर कब्ज की शिकायत भी होती है। वैसे मरीज को पेट के दर्द के साथ−साथ सिर में भी दर्द होता है और यह पेट दर्द व सिरदर्द मरीज को लगातार बना रहता है।

अन्य लक्षण :  इन लक्षणों के अलावा भी कुछ लक्षण होते हैं। जो टाइफाइड के मरीजों में दिखाई देते हैं। जैसे उल्टी होना, दस्त होना, चेस्ट में कंजेशन, सुस्ती, पसीना आना आदि। टाइफाइड में जहां बड़ों को कब्ज होने का खतरा होता है, वहीं बच्चों में दस्त की समस्या देखी जाती है।  

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