#मामला भगवानपुर प्रखंड के  खीरी गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय का 

भभुआ कैमूर(बंटी जायसवाल)। बिहार के कैमूर जिले में स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा फहराने के बाद उसे उतारकर सुरक्षित न रख कर, ऐसे ही विद्यालय के बरामदे में छोड़ देने एवं उसके अपमान का एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है।वायरल वीडियो में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा के अपमान होने की बात कही जा रही है और कहा जा रहा है कि किस प्रकार तिरंगा झंडा फहराने के बाद उसे उतारकर ऐसे ही छोड़ दिया गया है।  जिससे राष्ट्रीय तिरंगा झंडा का अपमान हुआ है। यह वायरल वीडियो कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के खीरी गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय क्या बताया जाता है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति बोल रहा है कि यह खीरी गांव का विद्यालय है।जहां 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यालय में झंडा फहराया गया। 

लेकिन उस तिरंगे झंडे को उतारा तो गया है लेकिन एक बरामदे में ऐसे ही उतार कर छोड़ दिया गया है।उसे सुरक्षित नहीं रखा गया है शिक्षकों या प्रधानाध्यापक द्वारा। इसके साथ ही विद्यालय का पूरा सीन दिखाया जा रहा है। वायरल वीडियो में विद्यालय में कुछ बच्चे व लोग भी दिख रहे हैं। इसके साथ ही वायरल वीडियो में हेडमास्टर का नाम और नंबर भी दिखाया जा रहा है। जिसमें हेडमास्टर के नाम दिलीप कुमार गुप्ता उनका नंबर भी दिखाया गया है।

ग्रामीणों को इस बात की जानकारी सोमवार को तब हुई जब ग्रामीण विद्यालय में गए तो देखा कि विद्यालय के एक कमरे के बरामदे में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा जिस पाइप में फहराया गया था। उसी पाइप के साथ बरामदे में नीचे जैसे तैसे गंदगी में रखा गया है। जो राष्ट्रीय ध्वज के अपमान किया गया है।ऐसा राष्ट्रीय ध्वज के साथ नहीं होना चाहिए था और इसी दौरान किसी ने राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है।यह तिरंगा झंडा का अपमान का काफी तेजी से वीडियो वायरल हो गया है। वायरल वीडियो के माध्यम से लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर कई प्रकार की बातें कहीं जा रही है। लोगों द्वारा प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों पर कार्रवाई करने के भी बातें प्रशासन से मांग उठाई जा रही हैं।

जब इस मामले में खीरी गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार गुप्ता से पूछे जाने पर बताया कि 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यालय में झंडा झंडोत्तोलन किया गया। उसके बाद तिरंगा झंडा को उतारने के लिए विद्यालय के छात्रों को कह दिया गया था।छात्रों ने उस शाम को तिरंगा झंडा को उतारकर सीढ़ियों रख दिया था। इसी बीच गांव के ही लोगों द्वारा तिरंगा झंडा को सीढ़ियों में से निकालकर बरामदे में रख दिया गया है। उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया गया है। बदनाम करने की कोशिश की गई है और किसी की खुराफात लगती है। 

प्रधानाध्यापक को तनिक भी संकोच नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा को फहराने की जिम्मेदारी उनके पास मिली है तो उन्हें राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा को उतारने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं को है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रधानाध्यापक द्वारा ना तो अपने ही तिरंगा झंडा को उतारा गया और ना ही शिक्षकों से तिरंगा झंडा को उतरवा कर रखा गया। छात्रों को तिरंगा झंडा उतारने की जिम्मेदारी क्यों दे दी गई।

अगर अपने या शिक्षकों से तिरंगा झंडा को सुरक्षित उतार कर कार्यालय में रखा जाता तो राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा का अपमान नहीं होता और ना ही वीडियो वायरल होता। छात्रों को क्या जानकारी है कि तिरंगा झंडा का अपमान किया होता है और छात्रों ने जैसे तैसे तिरंगा झंडा को उतारकर सीढ़ियों में रख दिया। इसी में किसी ने तिरंगा झंडा को बरामदे में रख दिया या फिर छात्रों ने ही उसी तरह उतार कर रख दिया। लेकिन इसमें लापरवाही विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों का ही लोगों द्वारा बताया जाता है।

वही इस संबंध में पूछे जाने पर भगवानपुर बीडीओ मयंक कुमार सिंह ने बताया कि खीरी गांव के विद्यालय के राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस मामले में विद्यालय के प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण पूछा गया है। अब स्पष्टीकरण में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को लेकर हेडमास्टर या शिक्षकों पर क्या कार्रवाई की जाती है। 

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